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जंगल का राजा
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जंगल का राजा

✍️ Aakash Sharma
October 25, 2024
3 min read

रामपुर गाँव के ठीक पीछे एक विशाल और अत्यंत घना जंगल था, जिसे लोग "कालवन" कहते थे। उस जंगल के बारे में गाँव में अजीब-अजीब कहानियाँ और अफवाहें फैली हुई थीं। लोग कहते थे कि उस जंगल में एक डरावना साया रहता है, जो किसी भी इंसान को जीवित वापस नहीं आने देता। सूर्यास्त के बाद उस जंगल से अजीब भयानक दहाड़ें और रोने की आवाज़ें सुनाई देती थीं। गाँव के सरपंच ने पूरे गाँव में कड़ा नियम बना दिया था कि कोई भी व्यक्ति जंगल की सीमा के अंदर पैर नहीं रखेगा।

विकास गाँव का एक युवा, निडर और जिज्ञासु लड़का था। वह इन पुरानी डरावनी कहानियों पर भरोसा नहीं करता था। उसका मानना था कि हर रहस्य के पीछे कोई न कोई तार्किक सच छुपा होता है। उसने तय किया कि वह इस कालवन के रहस्य का पता लगाएगा और सच्चाई सबके सामने लाएगा। एक दिन सुबह-सुबह, विकास ने अपनी पीठ पर एक थैला टांगा, जिसमें एक टॉर्च, कुछ रस्सी और पानी की बोतल थी, और वह चुपके से जंगल के घने रास्ते की ओर बढ़ गया।

जैसे-जैसे विकास जंगल के भीतर जा रहा था, सूरज की किरणें गायब हो रही थीं और चारों तरफ केवल पेड़ों की सरसराहट की आवाज़ें आ रही थीं। जंगल में बहुत ऊंचे-ऊंचे और प्राचीन वृक्ष थे। दोपहर के समय भी वहाँ शाम जैसा अंधेरा महसूस हो रहा था। अचानक विकास को दूर झाड़ियों में एक हलचल दिखाई दी। वह धीरे-धीरे झाड़ियों के पास पहुँचा। उसने देखा कि वहाँ एक विशाल चीता लेटा हुआ था। लेकिन वह चीता किसी को नुकसान पहुँचाने की स्थिति में नहीं था; वह दर्द से तड़प रहा था। उसके पिछले पैर में एक बड़ा और नुकीला लोहे का फंदा फंसा हुआ था, जो शायद शिकारियों ने लगाया था।

विकास को समझ आ गया कि रात में जो डरावनी दहाड़ें सुनाई देती थीं, वह इसी घायल चीते की दर्द की चीखें थीं। विकास के मन में डर था, लेकिन उसने जानवर की लाचारी को सर्वोपरि समझा। उसने बहुत ही शांत और कोमल स्वर में चीते से बात करना शुरू किया ताकि वह आक्रामक न हो। विकास धीरे-धीरे आगे बढ़ा और अपने थैले से दवा और पट्टी निकाली। उसने बहुत सावधानी से चीते के पैर से लोहे के फंदे को निकाला और घाव पर जड़ी-बूटियों का रस लगाकर पट्टी बांध दी।

चीते ने अपनी शांत आँखों से विकास की ओर देखा। उसकी आँखों में अब कोई हिंसक क्रोध नहीं था, बल्कि कृतज्ञता और राहत का भाव था। उसने बहुत धीरे से अपना सिर विकास के हाथ पर रगड़ दिया, जैसे वह धन्यवाद कह रहा हो। विकास को महसूस हुआ कि जानवर भी प्यार और दया की भाषा बहुत अच्छी तरह समझते हैं। वह चीता कोई डरावना साया नहीं था, बल्कि शिकारियों की क्रूरता का शिकार एक लाचार जीव था।

शाम को विकास सुरक्षित रूप से गाँव वापस आ गया। उसने चौपाल पर सरपंच और पूरे गाँव को इकट्ठा किया और जंगल का असली राज बताया। उसने कहा, "जंगल में कोई भुतहा साया नहीं है, बल्कि शिकारियों के फंदे में फंसा एक घायल चीता था जो दर्द से चिल्लाता था। हमें जंगल से डरने की नहीं, बल्कि शिकारियों से जंगल और जीवों की रक्षा करने की ज़रूरत है।" गाँव के लोगों की आँखें खुल गईं। उन्होंने शिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। विकास की इस बहादुरी और दयालुता ने रामपुर गाँव को हमेशा के लिए अंधविश्वास के अंधेरे से बाहर निकाल दिया।