E
examvy
गेहलोत का गधा
Back to all posts
hasya

गेहलोत का गधा

✍️ Aakash Sharma
June 2, 2024
3 min read

रामपुर गाँव में गेहलोत नाम का एक बड़ा ही मजेदार और निराला आदमी रहता था। गेहलोत अपनी अजीब आदतों के लिए पूरे गाँव में जाना जाता था। उसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह जितना जिद्दी था, उससे दस गुना ज्यादा जिद्दी उसका गधा "कालू" था। गेहलोत ने कालू को बहुत लाड-प्यार से पाला था, लेकिन कालू इतना अतरंगी था कि वह केवल वही करता था जो उसके मन में आता था। यदि उसे कहीं रुकना होता, तो उसे लाख लाठियाँ मारने पर भी वह एक इंच आगे नहीं बढ़ता था। गाँव के लोग अक्सर उनके तमाशे को देखने के लिए इकट्ठा हो जाते थे।

एक दिन गेहलोत को पास के गाँव में अपनी साली की शादी में जाना था। उसने सोचा कि पैदल जाने से अच्छा है कि वह कालू की सवारी करे। उसने बढ़िया कुर्ता-पायजामा पहना, सिर पर गुलाबी पगड़ी बांधी और कालू के ऊपर बैठ गया। कालू शुरू में तो बहुत अच्छे मूड में चल रहा था, लेकिन जैसे ही वे रामपुर गाँव के मुख्य बाज़ार के बीच पहुँचे, कालू अचानक रुक गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और बीच सड़क पर खड़ा हो गया। गेहलोत ने उसे पुचकारा, "चल कालू मेरे भाई, देर हो जाएगी।" लेकिन कालू टस से मस नहीं हुआ।

गाँव के लोगों ने तमाशा देखना शुरू कर दिया। हलवाई रामदीन ने कहा, "गेहलोत भाई, इसके आगे थोड़ा सा हरा चारा डालो।" गेहलोत ने चारे की व्यवस्था की, लेकिन कालू ने चारे की तरफ देखा तक नहीं। तभी गाँव के दर्जी ने सलाह दी, "इसके कान में थोड़ा पानी डालो, ये खुद भागेगा।" गेहलोत ने जैसे ही कालू के कान में पानी डाला, कालू ने ज़ोरदार लात चलाई, जो सीधे हलवाई की जलेबी कड़ाही के पास रखे खाली पीपे पर लगी। आवाज़ से घबराकर कालू अब रुकने के बजाय बेतहाशा भागने लगा।

कालू सीधा रामपुर गाँव के सरपंच जी के घर के आँगन में घुस गया, जहाँ सरपंच साहब पंचायत की एक गंभीर बैठक ले रहे थे। कालू ने सरपंच साहब की मेज पर टक्कर मार दी, जिससे सरपंच जी की चाय उनके सफेद कुर्ते पर गिर गई। चारों तरफ हड़कंप मच गया। लोग चिल्लाने लगे, "पकड़ो! पकड़ो!" गेहलोत कालू की पीठ पर चिपका हुआ चिल्ला रहा था, "ब्रेक कहाँ है भाई, इसका ब्रेक कहाँ है!" कालू वहाँ से भागा और सीधे मास्टर जी की धोती को अपने मुँह में दबाकर खींच लिया। गाँव वाले हँसते-हँसते लोटपोट हो रहे थे।

अंत में, गाँव की एक छोटी सी बच्ची पिंकी ने अपनी सूझबूझ दिखाई। वह अपने हाथ में एक बड़ी सी लाल मिर्च लिए हुए थी, जिसे देखकर कालू शायद डरता था या आकर्षित होता था। पिंकी ने उस लाल मिर्च को धागे में बांधकर एक बांस की लकड़ी के सिरे पर लटका दिया और कालू के मुँह के आगे कर दिया। कालू लाल मिर्च पाने के चक्कर में पिंकी के पीछे-पीछे बहुत शांत भाव से चलने लगा। इस प्रकार कालू का कहर थमा और गेहलोत सुरक्षित ज़मीन पर उतरा।

सरपंच साहब ने गुस्से में गेहलोत पर पचास रुपये का जुर्माना लगाया। गेहलोत ने हाथ जोड़कर माफी मांगी और जुर्माना भरा। यद्यपि गेहलोत शादी में नहीं पहुँच पाया और उसकी पगड़ी भी धूल में मिल चुकी थी, लेकिन रामपुर गाँव के लोगों को हँसने का एक ऐसा ऐतिहासिक बहाना मिल गया था जिसे वे कई सालों तक नहीं भूल पाए। आज भी जब रामपुर गाँव के चौपाल पर कोई हंसने की बात चलती है, तो गेहलोत और उसके वफादार अतरंगी गधे कालू की सवारी का किस्सा सबसे पहले सुनाया जाता है।