Examvy.
Back to all posts
rahasya

हवेली का भेद

May 12, 2024
4 min read
AI Summarization

Pressed for time? Generate a smart, concise summary of this post powered by Google Gemini.


विक्रम जी अपने सरकारी काम के सिलसिले में एक पुराने शहर में स्थानांतरित हुए थे। वे अपनी पत्नी सरिता और इकलौते बेटे मानस के साथ वहाँ पहुँचे। चूंकि सरकारी आवास मिलने में कुछ समय था, इसलिए उन्होंने शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक बहुत बड़ी और आलीशान हवेली को किराए पर ले लिया। यह हवेली काफी पुरानी थी, लेकिन इसका किराया बहुत ही कम था। जब विक्रम जी ने मकान मालिक से कम किराए का कारण पूछा, तो उसने बात टाल दी और कहा कि यह हवेली बहुत समय से खाली पड़ी थी, इसलिए वे इसे सस्ते में दे रहे हैं।

हवेली के चारों ओर बड़ा बगीचा था और इसकी नक्काशी देखने लायक थी। लेकिन प्रवेश करने के पहले ही दिन से मानस को हवेली में कुछ विचित्र महसूस होने लगा। पहले ही दिन जब वह अपने कमरे में सो रहा था, तो उसे रात के ठीक बारह बजे घुँघरुओं की हल्की आवाज़ सुनाई दी। वह उठकर बाहर आया, लेकिन बाहर कोई नहीं था। उसने सोचा कि शायद उसका भ्रम होगा। लेकिन अगले दिन सरिता जी को रसोई में बर्तन गिरने की आवाज़ आई, जबकि रसोई में कोई नहीं था। धीरे-धीरे अजीब घटनाओं का सिलसिला बढ़ता गया। कभी-कभी दरी के नीचे कोई परछाईं हिलती हुई दिखाई देती, तो कभी कमरों के दरवाज़े अपने आप बंद और चालू होते।

मानस ने इस रहस्य का पता लगाने का निर्णय लिया। वह एक साहसी और तार्किक लड़का था। उसने रात भर जागने और हवेली के कोने-कोने पर नज़र रखने की योजना बनाई। उसने अपने कमरे में एक छोटा गुप्त कैमरा लगा दिया। रात को ठीक बारह बजे फिर वही घुँघरुओं की झनझनाहट शुरू हुई। मानस दबा दबे कदम उस आवाज़ की दिशा में बढ़ा। आवाज़ हवेली के तहखाने की ओर से आ रही थी। तहखाना हमेशा बंद रहता था और उस पर बड़ा जंग लगा ताला लटका था। मानस जब तहखाने के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि ताला खुला हुआ था।

वह अंदर गया। तहखाने में बहुत अंधेरा था, लेकिन उसकी टॉर्च की रोशनी में उसे एक पुरानी बड़ी सीढ़ी दिखाई दी। सीढ़ी के नीचे एक छोटा कमरा था, जहाँ एक बूढ़ा व्यक्ति बैठा हुआ था। उस बूढ़े व्यक्ति के हाथ में कुछ पुराने पीतल के बर्तन और घुँघरु थे, जिन्हें वह साफ़ कर रहा था। मानस को देखकर वह बूढ़ा घबरा गया। मानस ने हिम्मत से काम लिया और शांत स्वर में पूछा, "आप कौन हैं बाबा? और इस तरह गुप्त रूप से हमारी हवेली के तहखाने में क्यों रह रहे हैं? रात को ये आवाज़ें आप क्यों करते हैं?"

बूढ़े व्यक्ति ने रोते हुए अपना हाथ जोड़ लिया और कहा, "बेटा, मुझे माफ़ कर दो। मेरा नाम रघु है। मैं इस हवेली का पुराना रखवाला हूँ। साठ साल पहले इस हवेली के मालिक के पूर्वज मेरे परिवार के बहुत ऋणी थे। बदले में उन्होंने मुझे इस हवेली के तहखाने में रहने का अधिकार दिया था। लेकिन जब हवेली नए मालिकों के हाथ में गई, तो वे मुझे यहाँ से निकालना चाहते थे। उनके पास मेरी वसीयत का रिकॉर्ड नहीं था। मेरे पास कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। मैं डरावनी आवाज़ें इसलिए निकालता था ताकि लोग इस हवेली को भुतहा समझकर खाली कर दें और मैं यहाँ शांति से रह सकूँ।"

मानस को रघु बाबा की लाचारी पर दया आ गई। उसने इस बारे में अपने माता-पिता को बताया। विक्रम जी ने रघु बाबा की स्थिति को समझा और मकान मालिक से बात की। विक्रम जी ने कानून की मदद से और पुराने दस्तावेज़ दिखाकर मकान मालिक को मनाया कि वह रघु बाबा को हवेली के पिछले हिस्से में एक छोटे कमरे में कानूनी रूप से रहने दे। इस प्रकार हवेली का "भुतहा रहस्य" सुलझ गया। जो डरावनी आवाज़ें लोगों को भयभीत करती थीं, वे वास्तव में एक गरीब बूढ़े की अपनी छत बचाने की लाचार कोशिश थी। गाँव और शहर के लोगों को जब यह सच पता चला, तो सबने विक्रम जी के परिवार की इस इंसानियत की बहुत तारीफ की।

Ask Examvy AI

Have questions about this article? Engage in a dialogue with Gemini AI to explore the post's themes, takeaways, and nuances.

Suggested questions: